अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार शेख अल-अज़हर ने कहा इस्राइल समर्थक हुसनी मुबारक सरकार ने मुझ सहित सभी उलेमाए मिस्र को लंबे समय से दबाव में रखा ताकि शियों को काफ़िर करार दें. उन्होंने कहा इस्लाम सैयद हसन नसरूल्लाह जैसे महान मुजाहिद पर गर्व करता है. अल-आलम वेबसाइट ने अत-तवाफुक समाचार वेबसाइट के हवाले से खबर दी है कि शेख अल-अज़हर डॉ. अहमद तय्यब ने कल मिस्र की राजनीतिक नासिर पार्टी के नेताओं से मुलाक़ात की और हुसनी मुबारक सरकार के धौंस और दबाव और कई तरह की समस्याओं का खुलासा करते हुए कहा हुसनी मुबारक जायोनी शासन की ख़ुशी प्राप्त करने और इस्लामी राष्ट्रों के बीच झगड़ा कराने के उद्देश्य से मिस्री उलमा पर लगातार दबाव डालते रहे कि फतवा देकर शियों को काफ़िर करार दें. उन्होंने कहा हसनी मुबारक ने मुझसे कई बार कहा कि शियों और लेबनान के हिज्बुल्ला के खिलाफ फतवा जारी करूँ लेकिन दबाव के बावजूद मैंने उनकी यह इच्छा ठुकरा दी. डॉक्टर तय्यब ने कहाः हुसनी मुबारक के सुरक्षा संस्थानों से भी मुझे बहुत दबाव का सामना था और यह दबाव तब तक अधिक गंभीर था जब मैं मिस्र का मुफ्ती था और जब मुझे शेखे अल-अज़हर बनाया गया तो दबाव में भी कमी आ गई लेकिन दबाव वर्तमान सार्वजनिक क्रांति के परिणाम स्वरूप हुसनी मुबारक सरकार के पतन तक जारी था. ........166
शेख अल-अज़हर:
मुझ पर शियों को काफ़िर कहने के लिए दबाव था/ इस्लाम नसरूल्लाह जैसे मुजाहिद पर गर्व करता है
11 जुलाई 2011 - 19:30
समाचार कोड: 253121
हुसनी मुबारक याजोनियों की ख़ुशी के लिए और इस्लामी राष्ट्रों के बीच झगड़ा कराने के उद्देश्य से मिस्री उलेमा को फतवा देकर शियों को काफ़िर घोषित करने पर उतारू करना चाहते थे/ सैयद हसन नसरूल्लाह जैसे महान मुजाहिद पर गर्व है; जिन्होंने याजोनियों को ऐसा सबक सिखाया है जिसे वह कभी भी न भुला सकेंगे और नसरूल्लाह और उनके साथी मुसलमान और मुजाहिद हैं. मुसलमान को काफ़िर कहने वालों का हाल ...